Monday, February 3, 2020

पतिया पढ़कर अँखियाँ रोवत

पतिया पढ़कर अँखियाँ रोवत, बतिया कइसे भुलाई
जोगीन होइके सुध-बुध भूले, सथिया कइसे भुलाई

हमका छोड़ि बसे हो बिदेशवा, कुछु न समझ में आई
अम्मा-बाबूजी भी देखत हउवे, बचवा कहिया ले आई

दिन भर काज में बीती जाये, रतिया बिताई न जाई
बिरह बियोग से मदन सतावै, आवे ना औव्हाई

बसंत बयार करेजवा छिलत, देहिया बहुत पिराई
कइसन दरद दिहा बेदर्दी, तू तो भया है कसाई

जो मैं जनती अइसन करबा, देइत न तोहका जाई
फटही धोती पहिन के साजन, देइत उमर बिताई

सुखी रोटी खाइके हमबलम के लेईत रिझाई
अइसन चाकरी पे पाथर पड़े, जो बलम के देत अलगाई

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