मेरा बेटा अब बड़ा हो गया है
अपने पैरों पर खड़ा हो गया है
घूम-घूम कर गांव में सारे
वो सबको बतलाती है
बहु- बेटे की हर दिन चर्चा
लोगों को सुनातो है
दौड़ी-दौड़ी डाकघर में
गिरते पड़ते जाती है
चिट्ठी या संदेशा कोई
ना डाकघर में पाती है
अश्रु भरे नयनों से उसके
बहती गंगा की धारा है
बूढी मां का अब कोई
न जीने का सहारा है
राह जोहती है बच्चों का
एक दिन वापस आयेंगे
वो दिन भी अब दूर नहीं
जब खुशियां आँगन में लाएंगे
बैठ झोपड़ी में बुनती है
सपनो का ताना -बाना है
झूठी तसल्ली दिल को देती
ये तो एक बहाना है
ऐसे ही एक दिन उसके
प्राण पखेरू उड़ गए
तोडा नाता इस धरा से
ऊपर वाले से जुड़ गए
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