ट्यूशन के लिए घर से निकलना,
और रास्ते में उसका घर,
सुबह का आगमन
अब बड़ा ही याद आता है
सर्दी का भोर और साईकल के पैंडल पर जोर
सीधा उसके घर तक लाता था
अलाव तापती दिख जाती थी
अब बड़ा याद आता है
कनखियों से ही देखना,
फिर मुड़कर देखना कुछ आगे जाकर
वह मंद मुस्कान होठों के नीचे
अब बड़ा याद आता है
लौटते वक्त उसका इंतजार करना
कुएँ पर पानी भरना
रस्सी पकड़ कर उसका झुकना
अब बड़ा याद आता है
कुछ अधपके रिश्ते ठीक ऐसे ही होते है
मीठे तो बहुत लगते है,
पर कच्चे होते है
यह सब
अब बड़ा याद आता है।
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