कुछ देर जरा तुम रुक जाओ
चले जाना तुम भोर भये
बाँहों में तुझको भर लेता
बिना किसी के शोर किये
यौवन तेरा निहार लेता
अरसा हुआ तुझे गौर किये
तू कह देती मै सुन लेता
मन में जैसे एक चोर लिए
श्रृंगार तेरा मै कर देता
है जल उठते हजार दिए
तेरे होठों को चूम लेता
बिना कोई भी देर किये
प्यार का काजल भर देता था
आँखों में एक लकीर लिए
बह जाने दे मन के जज्बातों को
सुन्दर सुंगंध समीर लिए
विरह वेदना प्रेम प्रियतमा
लाज-शर्म से लब है सिले
चंद्ररात की इस बेला में
फिर
क्यों है हम आज मिले
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